◆ राजस्थान में गोवंश संरक्षण और आवारा नंदियों की समस्या से निपटने के लिए जल्द ही ‘नंदी बैंक’ की स्थापना की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य न केवल सड़कों पर घूमते पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना है, बल्कि देसी नस्लों के संवर्धन और गो आधारित खेती को बढ़ावा देना भी है। आइये, जानते हैं विस्तार से खबर।
◆ भीलवाड़ा के मालोला रोड स्थित प्रेमदन गोशाला में आयोजित एक प्रेसवार्ता में गौ राष्ट्र यात्रा के संयोजक और AWRI (जीव-जंतु कल्याण एवं कृषि शोध संस्थान) के अध्यक्ष भरत सिंह राजपुरोहित ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज गोवंश की रक्षा केवल आस्था का नहीं, बल्कि आर्थिक विवेक का भी विषय है। जब तक गाय को कृषि व ग्रामीण अर्थव्यवस्था से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक उसका संरक्षण अधूरा रहेगा।
◆ उन्होंने बताया कि ‘नंदी बैंक’ की स्थापना से न केवल आवारा नंदियों को ठिकाना मिलेगा, बल्कि किसानों को गो आधारित खेती के लिए देशी बैल आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। इससे परंपरागत खेती को मजबूती मिलेगी और देसी नस्लों के संवर्धन को भी गति मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना को जनसहभागिता और संस्थागत सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा।
◆ इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर में छुट्टा पशुओं की बढ़ती समस्या को लेकर चिंता जताई और बताया कि यह न केवल ग्रामीणों के लिए बल्कि प्रशासन के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। ‘नंदी बैंक’ योजना इस दिशा में एक ठोस समाधान के रूप में कार्य करेगी।
◆ KNTV के लिये भीलवाड़ा से गोविंद पायक की रिपोर्ट।








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