◆ पाली में जिला न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार ने लक्ष्मण कुमार बनाम विकास लोढा के अस्थायी निषेधाज्ञा (स्टे) मामले में बड़ा आदेश सुनाया है। यह फैसला जमीन की बिक्री और नकद लेन-देन से जुड़े गंभीर पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दिया गया है। आइये, जानते हैं विस्तार से खबर।
◆ दरअसल, लक्ष्मण कुमार के नाम पर महावीर नगर पाली में 1250 वर्गफीट भूमि दर्ज थी। उसमें से 625 वर्गफीट उसने पहले निहालचंद को बेची और बची 625 वर्गफीट भूमि में से 312.5 वर्गफीट बाबूलाल को बेच दी। इस तरह उसके पास केवल 312.5 वर्गफीट जमीन ही बची थी। इसके बावजूद उसने पुनः पूरी 1250 वर्गफीट भूमि को विकास लोढा को 95 लाख रुपये में विक्रय कर दी। बाद में लक्ष्मण कुमार ने इसी जमीन पर स्टे की मांग करते हुए न्यायालय में वाद दायर किया।
◆ न्यायालय ने माना कि लक्ष्मण कुमार ने स्वच्छ हाथों से न्यायालय की शरण नहीं ली है और उसका आचरण अनुचित है। इसलिए न्यायालय ने उसके स्टे आवेदन को खारिज कर दिया। साथ ही, न्यायाधीश ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि विकास लोढा ने जमीन खरीदने पर 64 लाख रुपये नकद दिए। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में न्यायालय ने इस नकद लेन-देन की जांच हेतु आयकर विभाग को निर्देश जारी किए हैं।
◆ इसके अलावा, न्यायालय ने यह भी पाया कि विकास लोढा और लक्ष्मण कुमार के बीच जमीन का इकरारनामा 95 लाख रुपये का किया गया, लेकिन विक्रय विलेख केवल 31 लाख रुपये का करवाया गया। शेष 64 लाख रुपये न तो विक्रय विलेख में अंकित किए गए और न ही उस पर पंजीयन शुल्क (Stamp Duty) जमा कराया गया। इस पर न्यायालय ने उप पंजीयन कार्यालय, पाली को भी आदेश दिया कि शेष राशि पर नियमानुसार स्टाम्प ड्यूटी वसूली जाए।
◆ इस आदेश ने न केवल जमीन के स्वामित्व विवाद को स्पष्ट किया है, बल्कि नकद लेन-देन और पंजीयन शुल्क से जुड़े मामलों में भी सख्त निर्देश देकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।
◆ News24 Xpress के लिये पाली से कार्यालय संवाददाता की रिपोर्ट।








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