पाली, 28 जून। जय जगन्नाथ… जय जगन्नाथ… पाली शहर इस पुण्य उद्घोष से गुंजायमान हुआ जब इस्कॉन द्वारा दूसरी बार भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया गया।
भक्तों के उल्लास और आस्था से सराबोर इस दिव्य यात्रा ने धार्मिक चेतना और आध्यात्मिक आनंद का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।
आइये, जानते हैं विस्तार से खबर।

◆ पाली शहर में इस्कॉन द्वारा निकाली गई दूसरी भव्य श्री जगन्नाथ रथ यात्रा में श्रद्धा, उत्साह और भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिला। शाम 4:30 बजे अग्रसेन भवन से आरंभ हुई यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—पानी दरवाजा, सर्राफा बाजार, धानमंडी, सोमनाथ मंदिर, सुरजपोल, नहर चौराहा व शिवाजी सर्कल से होते हुए इस्कॉन केन्द्र पहुंची। रथ को भक्तों ने 151 फीट लंबी रस्सी से खींचते हुए जय जगन्नाथ के गगनभेदी उद्घोषों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
◆ इस्कॉन के कार्तिक कृष्ण प्रभु के अनुसार, रथ यात्रा में श्री जगन्नाथ जी के दर्शन व रथ खींचने मात्र से व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। रथ को दिल्ली से आये विशेष पुष्पों से सजाया गया था और हर चौराहे पर रंगोली, पुष्प वर्षा तथा आरती का आयोजन कर श्रद्धालुओं ने आराधना की। जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दर्शन कर पूजा अर्चना में भाग लिया।
◆ रथ यात्रा के दौरान मुंबई, जोधपुर व पाली के वैष्णव मंडलियों ने मधुर हरिनाम संकीर्तन प्रस्तुत किया—हरे कृष्ण… हरे राम… जय जगन्नाथ—जिस पर शहरवासी भावविभोर होकर झूमते रहे। महिलाएं गोपी वेशभूषा में तो पुरुष धोती-कुर्ता धारण किए हुए उत्सव की शोभा बढ़ा रहे थे। इस्कॉन की प्रसिद्ध खिचड़ी प्रसाद का वितरण भी किया गया। झांकियां, कीर्तन, सजावट और भक्तों की सहभागिता ने रथ यात्रा को पाली शहर के लिए एक अविस्मरणीय अध्यात्मिक पर्व बना दिया।
◆ News24 Xpress के लिये पाली से महेंद्र लखावत की रिपोर्ट।









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